नवंबर 2025 के अंत में, भारत के सबसे व्यस्त हवाई अड्डे इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGIA) की एक तकनीकी खराबी और एयरबस का वैश्विक A320 रिकॉल एक साथ आकर दुनिया भर के यात्रियों के लिए एक यात्रा का संकट बन गए। दिल्ली में एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) मैसेजिंग सिस्टम का अचानक ठहर जाना और उसके तीन हफ्ते बाद एयरबस का 6,000 से अधिक A320 जेट्स के लिए आपातकालीन रिकॉल — दो अलग-अलग समस्याएं, लेकिन एक ही परिणाम: लाखों यात्री फंस गए।
दिल्ली एयरपोर्ट पर ATC की खराबी: जब नियंत्रण बंद हो गया
6 नवंबर, 2025 को शाम के समय, इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का ऑटोमेटिक मैसेज स्विचिंग सिस्टम अचानक बंद हो गया। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने पुष्टि की कि यह ग्राउंड-बेस्ड ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम की तकनीकी खराबी थी, जिसका कोई संबंध विमानों के सॉफ्टवेयर से नहीं था। इसके नतीजे में 300 से अधिक उड़ानें देरी से निकलीं — एयर इंडिया, इंडिगो और कई अन्य एयरलाइंस के विमान। फ्लाइट रैडार 24 के डेटा के अनुसार, लगभग सभी उड़ानें प्रभावित हुईं। हवाई अड्डे पर लंबी कतारें लग गईं, चेक-इन और बोर्डिंग प्रक्रियाएं धीमी पड़ गईं।
यह बाधा केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रही। मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट ऑथॉरिटी लिमिटेड (MIAL) ने 7 नवंबर को एक आधिकारिक सलाह जारी की: "दिल्ली की समस्या के कारण आपकी उड़ान में देरी हो सकती है।" यह बात स्पष्ट थी — एक बड़े हब की खराबी पूरे देश के फ्लाइट नेटवर्क को बाधित कर देती है। एक उड़ान देरी होने पर, विमान अपनी अगली लैंडिंग स्लॉट खो देता है, और वह देरी अगले एयरपोर्ट तक फैल जाती है।
एयरबस A320 का ऐतिहासिक रिकॉल: जब सॉफ्टवेयर ने उड़ान रोक दी
29 नवंबर, 2025 को, एयरबस ने अपने 55 साल के इतिहास में सबसे व्यापक रिकॉल की घोषणा की — 6,000 से अधिक A320-परिवार के विमान, जो दुनिया भर में उड़ रहे थे। इसका कारण था एक सॉफ्टवेयर वल्नरेबिलिटी, जिसे जेटब्लू एयरवेज की एक घटना ने उजागर किया था। यूरोपीय एविएशन सेफ्टी एजेंसी (EASA) ने तुरंत आदेश जारी किया: सभी एयरलाइंस को इस सॉफ्टवेयर अपडेट के बिना कोई विमान उड़ाने की अनुमति नहीं।
इसका असर तुरंत महसूस हुआ। एशिया और यूरोप में कई विमान जमीन पर रुक गए। अमेरिका में तो यह बहुत बुरा समय था — थैंक्सगिविंग के बाद का सबसे व्यस्त यात्रा समय। एयरलाइंस रात भर जागकर अपडेट लागू कर रही थीं। विज़ एयर ने 30 नवंबर को सुबह घोषणा की कि उनके सभी A320 विमानों में अपडेट पूरा हो चुका है। एयरएशिया ने कहा कि 48 घंटे में सब कुछ ठीक हो जाएगा।
भारत में कैसे प्रभावित हुए एयरलाइंस?
भारत में 338 A320-परिवार के विमान प्रभावित थे, जिनमें से अधिकांश इंडिगो और एयर इंडिया के थे। इंडिगो के पास 345 विमानों का बेड़ा है, जिसमें से 200 A320 परिवार के थे। उन्होंने 160 का रिसेट पूरा कर लिया था, लेकिन बाकी 40 के लिए अभी भी देरी हो रही थी। एयर इंडिया के 113 प्रभावित विमानों में से केवल 42 का अपडेट हुआ था। दिग्गज एयरलाइंस ने यात्रियों को स्पष्ट रूप से चेतावनी दी: "अगले कुछ दिनों में उड़ानों में देरी की संभावना है।"
भारतीय नागरिक विमानन निदेशालय (DGCA) ने इसे एक तरह का व्यवस्थित प्रतिक्रिया अभियान बना दिया। उन्होंने एयरलाइंस को 1 दिसंबर, 2025 तक सभी अपडेट पूरे करने का निर्देश दिया। यह एक ऐसा समय था जब लाखों भारतीय घर लौट रहे थे — दिवाली के बाद की यात्रा शुरू हो चुकी थी।
दो अलग समस्याएं, एक ही दुख
दिल्ली की ATC खराबी और एयरबस का रिकॉल — दोनों अलग थे। एक जमीन पर था, दूसरा हवा में। एक नियंत्रण टावर की तकनीक थी, दूसरा विमान का सॉफ्टवेयर। लेकिन जब दोनों एक साथ आ गए, तो यात्री अपनी योजनाओं के साथ बेकाबू हो गए।
एक बार जब दिल्ली की समस्या ठीक हो गई, तो एयरबस का रिकॉल ने नया बोझ डाल दिया। यात्री जो दिल्ली में फंसे थे, उन्हें अब एयरपोर्ट पर फिर से लंबी कतारें देखनी पड़ीं। एयरलाइंस के कर्मचारी दो तरफ से दबाव में थे — एक तरफ ट्रैफिक कंट्रोल के लिए डेटा रिस्टोर करना, दूसरी तरफ विमानों के सॉफ्टवेयर को रिसेट करना।
भविष्य के लिए क्या सीख?
इन दो घटनाओं ने एक चेतावनी भेजी है: हवाई यातायात की सुरक्षा अब केवल विमानों के इंजीनियरिंग पर नहीं, बल्कि जमीनी बुनियादी ढांचे पर भी निर्भर करती है। दिल्ली की ATC सिस्टम को अभी भी मैनुअल बैकअप के बिना चलाया जा रहा था। एयरबस के रिकॉल के बाद, दुनिया भर में एयरलाइंस ने अपने फ्लीट के लिए नियमित सॉफ्टवेयर ऑडिट की मांग की है।
भारतीय नियामक अब दोहरी सुरक्षा व्यवस्था की ओर बढ़ रहे हैं — जमीनी सिस्टम के लिए ऑफलाइन बैकअप और विमानों के लिए ऑटोमेटेड सॉफ्टवेयर वेरिफिकेशन। लेकिन यह सब कितनी जल्दी लागू होगा? अगली बार जब यह दोहरा संकट आएगा, तो क्या तैयारी होगी?
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दिल्ली एयरपोर्ट की ATC खराबी का क्या कारण था?
एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने पुष्टि की कि एक ऑटोमेटिक मैसेज स्विचिंग सिस्टम का तकनीकी दुर्घटना था, जो विमानों के बीच ट्रैफिक निर्देशों को स्थानांतरित करता था। यह विमान के सॉफ्टवेयर से अलग था — यह जमीनी इन्फ्रास्ट्रक्चर की खराबी थी, जिसमें सर्वर और कम्युनिकेशन लिंक्स प्रभावित हुए।
भारत में कितने एयरबस A320 विमान प्रभावित हुए?
भारत में कुल 338 एयरबस A320-परिवार के विमान प्रभावित थे, जिनमें से इंडिगो के 200 और एयर इंडिया के 113 थे। दिग्गज एयरलाइंस ने दिसंबर 1, 2025 तक अपडेट पूरा करने का लक्ष्य रखा था, जिसमें इंडिगो ने 160 विमानों और एयर इंडिया ने 42 विमानों का रिसेट पूरा किया।
एयरबस रिकॉल क्यों इतना बड़ा हुआ?
एयरबस A320 परिवार दुनिया का सबसे अधिक उड़ान भरने वाला विमान है — 2025 में इसने बोइंग 737 को पार कर लिया। एक छोटी सी सॉफ्टवेयर वल्नरेबिलिटी ने दुनिया भर के 6,000 से अधिक विमानों को प्रभावित किया, जो एयरबस के 55 साल के इतिहास में सबसे बड़ा रिकॉल बन गया।
यात्रियों को अगली बार क्या करना चाहिए?
अब यात्री न केवल अपनी उड़ान की स्थिति चेक करें, बल्कि एयरलाइंस के सोशल मीडिया अपडेट भी देखें। एयरबस के रिकॉल के बाद, कई एयरलाइंस ने अपने विमानों के लिए सॉफ्टवेयर अपडेट का समय घोषित किया है। अगर आपकी उड़ान देरी से निकल रही है, तो एयरपोर्ट पर जाने से पहले फ्लाइट ट्रैकर ऐप जैसे FlightAware या Google Flights का उपयोग करें।
क्या भारत में ऐसी घटनाएं दोबारा हो सकती हैं?
हां, अगर बुनियादी ढांचे को अपडेट नहीं किया गया। दिल्ली के ATC सिस्टम को 2010 के दशक में डिज़ाइन किया गया था, जो आज के डिजिटल ट्रैफिक के लिए पुराना है। DGCA ने अभी तक एक राष्ट्रीय डिजिटल ट्रैफिक मॉडर्नाइजेशन प्लान नहीं लागू किया है — जो अगली बार भी एक बड़ा जोखिम बना रहेगा।
एयरबस के रिकॉल का क्या प्रभाव अमेरिका पर पड़ा?
अमेरिका में थैंक्सगिविंग के बाद का सप्ताह साल का सबसे व्यस्त यात्रा समय है। एयरबस का रिकॉल इसी दौरान आया, जिससे दर्जनों अमेरिकी एयरलाइंस जैसे अलास्का एयरलाइंस और एयर जैपन ने उड़ानें रद्द कर दीं। यात्री अपने योजनाओं के आधार पर बदलाव करने के लिए बाध्य हुए, और यात्रा व्यय में लगभग 400 मिलियन डॉलर की हानि हुई।
Yogesh Popere 30.11.2025
ये ATC खराबी तो हमेशा से होती रही है, लेकिन अब तो बस एयरबस का सॉफ्टवेयर भी फेल हो गया। भारत में तो हर चीज़ टेस्ट किए बिना लगा देते हैं। अगली बार बस बंद हो जाएगा।
Manoj Rao 30.11.2025
क्या आपने कभी सोचा है कि ये सब एक ग्लोबल सिस्टम का इरादेमंद नियंत्रण हो सकता है? एयरबस, एयर इंडिया, DGCA - सब एक ही बैंक के हाथों में हैं। ये रिकॉल असल में एक टेस्ट है - कि हम जनता कितनी आसानी से बेकाबू हो जाते हैं। जब तक हम टेक्नोलॉजी को भगवान नहीं समझेंगे, तब तक ये चक्र चलता रहेगा।
Alok Kumar Sharma 30.11.2025
ये सब बस बहाना है। एयरलाइंस और एयरबस दोनों ही पैसे बचाने के लिए ये गड़बड़ियाँ करते हैं। एक छोटा सा अपडेट, एक घंटे का रिसेट - लेकिन दिनों की देरी? बस यात्रियों को डरा कर टिकट बढ़ाने की ठान ली गई है।
Tanya Bhargav 30.11.2025
मैंने अपनी यात्रा रद्द कर दी थी इस वजह से। मेरी माँ को डॉक्टर के पास जाना था, लेकिन उड़ान रद्द हो गई। अब तक उसका दर्द नहीं गया। इतनी बड़ी बात हो रही है और कोई नहीं सुन रहा।
Sanket Sonar 30.11.2025
ATC और एयरबस का रिकॉल - दो अलग लेयर्स, एक ही फेल्योर। जमीनी इन्फ्रास्ट्रक्चर ओल्ड स्टैक, एयरक्राफ्ट सॉफ्टवेयर नॉट ब्लूप्रिंटेड। डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन का नाम तो है, पर एक्शन नहीं। इंडिया के लिए ये एक सिस्टमिक रिस्क है।
pravin s 30.11.2025
मुझे लगता है अगर हम अपने एयरपोर्ट्स को अपडेट करेंगे तो ऐसी चीजें कम हो जाएंगी। एक छोटी सी बदलाव बहुत कुछ बदल सकता है।
Bharat Mewada 30.11.2025
हम सब यात्रा करते हैं, लेकिन क्या हमने कभी सोचा कि जिस टेक्नोलॉजी से हम उड़ते हैं, वो कितनी अस्थिर है? एक लाइन कोड के बारे में सोचना जरूरी है - जो हमारी जिंदगी को रोक सकती है। ये एक दर्द है, जिसे हम आम बना रहे हैं।
Ambika Dhal 30.11.2025
ये सब इंडिया की नैतिक गिरावट का परिणाम है। कोई भी चीज़ बेहतर बनाने की बजाय बस चलती रहती है। एयरबस का रिकॉल तो बहुत बड़ा है, लेकिन इंडिया के लोगों की भूल और लापरवाही उससे भी बड़ी है।
Vaneet Goyal 30.11.2025
अगर एयरपोर्ट के ATC का बैकअप नहीं है, तो ये बेवकूफी है। और अगर एयरबस ने 6000 विमानों को अपडेट करने में दो हफ्ते लगाए, तो ये निष्क्रियता है। हम इतने आधुनिक हैं, लेकिन इतने पीछे हैं।
Amita Sinha 30.11.2025
बस इतना ही हुआ और पूरा देश फंस गया 😭 ये जो लोग इसे नियंत्रित करते हैं, उन्हें नौकरी से निकाल देना चाहिए। ये बस टिकट बेचने के लिए ये सब कर रहे हैं।
Bhavesh Makwana 30.11.2025
ये सब एक नया अवसर है। हमें अपने एयरपोर्ट्स को नया बनाना होगा, सॉफ्टवेयर को रेगुलर ऑडिट करना होगा। इस बार नहीं, अगली बार के लिए तैयार होना होगा। बदलाव संभव है - बस हमें चाहिए।