गेंदबाजी कोच: कैसे चुनें और अपनी गेंदबाजी तेज़ी से सुधारें

क्या आप अपनी गेंदबाजी में सुधार चाहते हैं लेकिन नहीं जानते कि किस कोच के साथ जाएं? सही गेंदबाजी कोच आपकी तकनीक, फिटनेस और मानसिकता तीनों बदल सकता है। नीचे सीधे, काम की बातें बताई गई हैं जिसे पढ़कर आप समझ जाएंगे कि किस तरह का कोच आपके लिए उपयुक्त रहेगा और किस तरह की ट्रेनिंग तेज असर देगी।

गेंदबाजी कोच से क्या उम्मीद रखें

एक अच्छा गेंदबाजी कोच केवल टिप्स नहीं देता, बल्कि समस्या पहचान कर समाधान देता है। वह आपकी रोक-टेकनीक, रन-अप, डिलीवरी आर्म, यॉर्कर और लाइन-लेंथ पर काम करेगा। अगर आप तेज गेंदबाज हैं तो स्पीड, रिवर्स स्विंग और फिटनेस पर ध्यान मिलेगा। स्पिनर्स के लिए विकेट लेंथ, फ्लाइट और फ़िंगर/रिस्ट पोज़िशन पर गहराई से अभ्यास कराएगा।

प्रैक्टिकल कैसे पहचानें: कोच के पास खुद का खेल का अनुभव हो या उसने प्रो खिलाड़ियों को ट्रेन किया हो। वीडियो विश्लेषण, बायोमैकेनिक्स समझना और चोट रोकने के तरीके जानना जरूरी है। अच्छा कोच व्यवहार में साफ़ निर्देश देता है और छोटे-छोटे लक्ष्यों से प्रगति दिखाता है।

प्रैक्टिकल ड्रिल्स और सत्र योजना

एक असरदार सत्र में आम तौर पर तीन हिस्से होते हैं: वार्म-अप, तकनीकी ड्रिल्स और कंडीशनिंग/रिकवरी।

वार्म-अप: 10–15 मिनट हल्की दौड़, डाइनामिक स्ट्रेचिंग, कंधे और कोर एक्टिवेशन। यह चोट से बचाता है और गेंदबाजी की तैयारी कराता है।

टेकनीकी ड्रिल्स: लाइन-लेंथ ड्रिल—बॉक्स मार्क करके 4 रन-अप से लगातार 12 गेंदें फेंकें, लक्ष्य में सुधार दर्ज करें। यॉर्कर ड्रिल—मिडिल प्वाइंट पर कन्सटेंट लक्ष्य रखें। स्पिनर्स के लिए: फ्लाइट और बाउंस ड्रिल, 6-8 ओवर में 3 अलग-अलग स्पिनिंग प्वाइंट्स पर निशाना लगाएं।

कंडीशनिंग और रिकवरी: रन-अप सprints, कूल-डाउन स्ट्रेच और फोम रोलिंग। कोच को लोड मैनेजमेंट समझना चाहिए ताकि युवा गेंदबाज ओवरयूज़ इंजरी से बचे रहें।

सेशन की आवृत्ति: शुरुआती खिलाड़ी 2–3 बार हफ्ते में, मध्यम लेवल 3–4 बार और प्रो खेली जाने पर रोजाना हल्का फोकस। छोटे इंटरवल वाले, लक्षित सेशंस ज़्यादा कारगर होते हैं—30–45 मिनट फोकस्ड तकनीक, बाकी फिटनेस।

कोच चुनते समय सवाल जो आप पूछें: उसने किन खिलाड़ियों को ट्रेन किया है? क्या वो वीडियो एनालिसिस देता है? चोट रोकने के क्या तरीके अपनाता है? क्या सत्र में योजना और घरेलू अभ्यास दिए जाते हैं? जवाब स्पष्ट हों तो फैसला आसान रहेगा।

अंत में, मेहनत और नियमितता जरूरी है। सही गेंदबाजी कोच मिले तो तकनीक तेज़ी से सुधरती है, पर खिलाड़ी को कोच की बताई गई रोज़ाना छोटी आदतें भी अपनानी होंगी—स्ट्रेचिंग, वीडियो देखना और सटीक लक्ष्य पर काम। अगर आप प्रोफेशनल या जूनियर माता-पिता हैं, तो छोटे-छोटे लक्ष्य तय करिए और प्रगति रिकॉर्ड रखिए।

आशा है ये पेज आपको गेंदबाजी कोच चुनने और ट्रेनिंग प्लान बनाने में मदद करेगा। हमारे टैग 'गेंदबाजी कोच' में संबंधित खबरें और अभ्यास गाइड पढ़ते रहें।

भारतीय क्रिकेट टीम के गेंदबाजी कोच बने मोर्ने मोर्कल: भारतीय क्रिकेट में नई शुरुआत

भारतीय क्रिकेट टीम के गेंदबाजी कोच बने मोर्ने मोर्कल: भारतीय क्रिकेट में नई शुरुआत

पूर्व दक्षिण अफ्रीकी तेज गेंदबाज मोर्ने मोर्कल को भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम का गेंदबाजी कोच नियुक्त किया गया है। बीसीसीआई सचिव जय शाह ने बुधवार को इसकी पुष्टि की। मोर्कल का कार्यकाल 1 सितंबर से शुरू होगा। उन्होंने पहले भी लखनऊ सुपर जायंट्स के साथ मुख्य कोच गौतम गंभीर के साथ काम किया है। उनका पहला असाइनमेंट बांग्लादेश सीरीज होगा।

Abhinash Nayak 14.08.2024