निर्जला एकादशी: बिना पानी के व्रत का सरल मार्गदर्शक

निर्जला एकादशी को सबसे कठोर मगर पुण्यदायक व्रत माना जाता है क्योंकि इस दिन न खाने का ही नहीं, पानी भी नहीं पीया जाता। धार्मिक मान्यताओं में कहा जाता है कि यह व्रत करने से पापों से मुक्ति और भव्य पुण्य मिलता है। अगर आप यह व्रत करने की सोच रहे हैं, तो जानना जरूरी है कि कैसे सुरक्षित और सही ढंग से पालन करें।

व्रत की तिथि और धार्मिक महत्व

निर्जला एकादशी आम तौर पर ज्येष्ठ माह (मई-जून) में आती है, पर हर साल तिथि बदलती है—इसलिए पंचांग या अपने मंदिर से तिथि की पुष्टि कर लें। पुराणों और लोक विश्वास के अनुसार, यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है और इसे करने से एकाएक कई एकादशियों के बराबर फल मिलता है। व्रत का मुख्य मकसद संयम, आत्मनियंत्रण और भक्ति बढ़ाना है।

व्रत के नियम और दिनचर्या

सुबह सूर्योदय से पहले स्नान कर लें और साफ कपड़े पहनें। व्रत आरम्भ से पहले हल्का भोजन और भरपूर पानी पी लेना समझदारी है, क्योंकि पूरा दिन बिना जल रहेगा। पूरे दिन भोजन और जल वर्जित रहता है; यदि परंपरा अनुसार आप अत्यंत श्रद्धा के साथ रखते हैं तो सिर्फ रातभर जागरण और भजन-कीर्तन करें।

पूजा में विष्णु का संकल्प लें, तुलसी, दीप और फल-फूल अर्पित करें। रात में जागरण या भजन के बाद अगले दिन द्वादशी (एकादशी के बाद का दिन) में सुबह की पूजा करके व्रत खोलें। व्रत खोलते समय पहले हल्का दूध या फल लें, फिर धीरे-धीरे सामान्य भोजन पर लौटें।

व्रत के दौरान ध्यान रखें: नशे, झूठ और किसी के साथ बुरा व्यवहार न करें। भक्ति और सरलता रखिए—व्रत का असली मतलब आत्मशुद्धि है।

स्वास्थ्य और वैकल्पिक उपाय

पूरा दिन बिना पानी रखने से शरीर पर असर होता है। इसलिए बच्चे, वृद्ध लोग, गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाएं, डायबिटीज या अन्य गंभीर बीमारियों वाले लोग निर्जला व्रत न रखें। अगर डॉक्टर ने मना किया है तो मत रखें।

अगर आप शारीरिक कारणों से निर्जला नहीं रख सकते, तो विकल्प हैं: जल सहित कठोर व्रत करना, केवल फल और दूध का सेवन रखना, या पूजा-उपासना के साथ दान देना और जरूरतमंदों को जल/खाद्य सामग्री देना। इन वैकल्पिक उपायों को भी श्रद्धा के साथ करना पुण्यदायक माना जाता है।

टिप्स संक्षेप में: तिथि पहले चेक करें, व्रत से एक दिन पहले हाइड्रेट रहें, व्रत के दौरान भारी शारीरिक काम न करें, और द्वादशी सुबह धीरे-धीरे व्रत खोलें। अगर असहज लगे तो तुरंत पानी लें और चिकित्सा सहायता लें।

निर्जला एकादशी सिर्फ कठोर नियम नहीं, बल्कि आत्मानुशासन और भक्ति का अभ्यास है। समझदारी से पालन करें—भक्ति साथ और सेहत का ध्यान साथ में रखें। शुभ व्रत।

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निर्जला एकादशी जो 2024 में 18 जून को पड़ रही है, भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी को समर्पित एक पवित्र उपवास है। इसे कठिन माना जाता है और अत्यधिक फलदायी भी। व्रत टूटने पर स्नान कर भगवान विष्णु का अभिषेक, मंत्र जाप और विशेष पूजा करने की सलाह दी जाती है। इस व्रत के दौरान कई नियमों का पालन किया जाता है जैसे तुलसी को न छूना, तामसिक भोजन से बचना और जमीन पर सोना।

Abhinash Nayak 17.06.2024