पुलिस हिरासत — जानिए आसान तरीके से अपने अधिकार और कदम

पुलिस हिरासत का नाम सुनते ही घबराहट होती है, पर समझ लेने से डर कम हो सकता है। अगर आप या आपका कोई करीबी पुलिस हिरासत में है तो जानना जरूरी है कि क्या होता है, कितने घंटे तक रखा जा सकता है, और किस तरह मदद मिल सकती है। नीचे सीधी और काम की जानकारी दी जा रही है।

पुलिस हिरासत और गिरफ्तारी में फर्क

गिरफ्तारी का मतलब है कि पुलिस ने किसी को शक के आधार पर रोका और जेल या थाने में रखा। हिरासत दो तरह की होती है — पुलिस हिरासत और न्यायिक हिरासत। पुलिस हिरासत में पुलिस को जांच के लिए आरोपी को सीमित समय के लिए थाने में रखना पड़ता है। न्यायिक हिरासत में आरोपी को कोर्ट के आदेश पर जेल भेजा जाता है।

कानून के मुताबिक, किसी को बिना वॉरंट के भी गिरफ्तार किया जा सकता है अगर वह अपराध करते पकड़ा गया हो या ठोस सबूत हों। पर पुलिस को गिरफ्तार कर के 24 घंटे के भीतर आरोपी को मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना होता है—यह समय सीमा महत्वपूर्ण है।

पुलिस हिरासत में आपकी मुख्य अधिकार

ये अधिकार आप तुरंत समझ लें और जरूरत पड़े तो बार-बार याद दिलाएँ:

- वकील से मिलना: गिरफ्तारी के बाद वकील से मिलने का अधिकार है। अगर वकील नहीं है, तो परिवार को बताने और मुफ्त वकील की मांग कर सकते हैं।

- 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश होना: पुलिस का आपका बिना कारण लम्बा रोका रखना गैरकानूनी है।

- मेडिकल जांच: अगर चोट लगी हो तो मेडिकल चेक करवाने का अधिकार है और रिपोर्ट को रिकॉर्ड कराना चाहिए।

- समझ में आने वाली भाषा में जानकारी: आपको बताया जाना चाहिए कि किस जुर्म में गिरफ्तार किया गया है।

यदि पुलिस इन अधिकारों की अवहेलना करे तो यह आपत्ति का विषय है—आप राइट टू रीलीफ के लिए हाईकोर्ट/सुप्रीम कोर्ट या नजदीकी मानवाधिकार संस्था से संपर्क कर सकते हैं।

क्या करें अगर कोई आपके परिवार वाला हिरासत में है?

फौरन ये कदम उठाएं:

1) थाने का पता और FIR/आरटीआई की कॉपी मांगें।

2) वकील बुलाएं या मुफ्त कानूनी सहायता के लिए लोकल बार एसोसिएशन से संपर्क करें।

3) मेडिकल जांच के लिए आग्रह करें और उसका न्यापत्र/रिपोर्ट सुरक्षित रखें।

4) संपर्क रिकॉर्ड रखें: कौन-कौन सी कार्रवाई हुई, किसने क्या कहा—यह बाद में काम आएगा।

अगर आपको लगे कि गिरफ्तारी गलत या मनमानी है, तो writ पिटिशन या Habeas Corpus के जरिए तुरंत कोर्ट की शरण लें।

अंत में, घबराने की बजाय तुरंत सही कदम उठाना जरूरी है—वकील से संपर्क, मेडिकल रिपोर्ट और रिकॉर्डिंग, और परिवार को सूचित करना। यह छोटे कदम अक्सर बड़ी मदद कर देते हैं। अगर आप चाहें तो वैराग समाचार के कानूनी रिपोर्ट सेक्शन में स्थानीय वकीलों के संपर्क और ताज़ा केस से जुड़ी खबरें भी देख सकते हैं।

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प्रसिद्ध अमेरिकी रैपर ट्रैविस स्कॉट को पेरिस में कथित शारीरिक मारपीट के आरोपों से मुक्त कर दिया गया। यह घटना 9 अगस्त 2024 को हुई थी जब सुरक्षा कर्मी ने उन्हें उनके बॉडीगार्ड से अलग करने की कोशिश की थी। स्कॉट को तुरंत पुलिस हिरासत में ले लिया गया था।

Abhinash Nayak 11.08.2024