शॉर्ट-सेलर: क्या होते हैं और आपको किस तरह समझना चाहिए

कभी किसी स्टॉक पर नकारात्मक रिपोर्ट पढ़ी और सोचा—क्या इसमें सच्चाई है या सिर्फ फैलाव? शॉर्ट-सेलर वे लोग या फर्में होते हैं जो किसी कंपनी के शेयर गिरने पर पैसा कमाने की कोशिश करते हैं। वे पहले शेयर उधार लेकर बेचते हैं और बाद में कम कीमत पर खरीदकर लौटाते हैं। अंतर उनका मुनाफा या नुकसान बनता है।

शॉर्ट-सेलिंग कैसे काम करती है

सिंपल तरीका—आपने 100 शेयर उधार लिए और 500 रुपए पर बेचे। अगर कीमत 300 रुपए पर आ जाए, तो आप 100 शेयर 300 रुपए में वापस खरीदकर उधार देने वाले को लौटा देते हैं। आपको 200 रुपए प्रति शेयर का लाभ हुआ। पर अगर कीमत बढ़कर 700 रुपए हो जाए तो नुकसान होता है। यानी शॉर्टिंग में जोखिम अमान्य रूप से बढ़ सकता है—नुकसान theoretically अनलिमिटेड हो सकता है।

शॉर्ट-सेलर अक्सर कंपनियों के वित्तीय रिकॉर्ड, संचालन, प्रमोटर गतिविधि या धोखाधड़ी जैसी कमियों को उजागर करने के लिए रिपोर्ट निकालते हैं। कभी-कभी उनका मकसद सिर्फ कीमतें दबाना भी होता है। इसलिए रिपोर्ट पढ़कर तुरंत फैसला न लें।

निवेशक के लिए प्रैक्टिकल गाइड और चेकलिस्ट

अगर आप किसी कंपनी पर शॉर्ट-सेलर रिपोर्ट देखते हैं तो ये स्टेप फॉलो करें—

1) स्रोत चेक करें: रिपोर्ट किसने जारी की है? क्या उसका इतिहास वैरिफाइड है? कई बार अनाम रिपोर्ट फैलती हैं।

2) सबूत देखें: केवल आरोप नहीं, दस्तावेज, बैंक ट्रांजेक्शन, कानूनी फाइलिंग या ऑडिट नोट्स देखें।

3) कंपनी filings पढ़ें: quarterly results, cash flow, related party transactions और promoter holdings देखें।

4) बाजार प्रतिक्रिया देखें: ट्रेडिंग वॉल्यूम और विकल्प (options) की खुली रुचि (open interest) बढ़ी है या नहीं। तेज बिकवाली और ओपन इंटरेस्ट में उछाल सचेत करने वाला संकेत हो सकता है।

5) समय दें: 24-72 घंटे में और खबरें, रेगुलेटरी नोटिस या प्रमोटर का बयान आ सकता है। पैनिक सेल मत करें।

6) जोखिम प्रबंधन: अगर आप निवेशक हैं तो स्टॉप‑लॉस रखें और पोर्टफोलियो का छोटा हिस्सा ही जोखिम में रखें।

एक और महत्वपूर्ण बात—भारत में SEBI के नियमों के तहत नग्न शॉर्ट‑सेलिंग पर पाबंदी और रिपोर्टिंग नियम कड़े हैं। किसी भी बड़े खुलासे के बाद रेज़र्वेशन या प्रवर्तन एजेंसियों की जांच का इंतजार करें।

अंतिम सलाह? शॉर्ट‑सेलर रिपोर्ट पढ़कर डरना आसान है, पर समझदारी वही है जो ठंडे दिमाग से सबूत और संख्या देखे। अगर आपको खुद पर भरोसा नहीं है तो किसी भरोसेमंद फाइनेंशियल एडवाइजर से बात करें। बाजार में खबरें तेज आती हैं, पर सही निर्णय वही जो तथ्य पर आधारित हो।

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अमेरिकी शॉर्ट-सेलिंग फर्म हिन्डेनबर्ग रिसर्च ने अडाणी ग्रुप से जुड़े बड़े वित्तीय खुलासे के बाद भारत में एक और बड़े खुलासे की ओर इशारा किया है। हिन्डेनबर्ग रिसर्च ने एक पोस्ट में कहा, 'भारत में कुछ बड़ा जल्द।' यह संदेश कई लोगों के बीच उत्सुकता पैदा कर रहा है कि अगला बड़ा कॉर्पोरेट निशाना कौन हो सकता है।

Abhinash Nayak 10.08.2024