मौसम ने फिर अपना खूंखार रूप धारण कर लिया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने उत्तर-पश्चिम, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के कई हिस्सों के लिए गंभीर चेतावनी जारी की है। पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से आसमान में बारिश, तेज हवाएं और ओलावृष्टि की संभावना है, जबकि कुछ क्षेत्रों में लू और धूल भरी आंधी का भी खतरा मंडरा रहा है। यह स्थिति अगले कुछ दिनों तक बना रहने की उम्मीद है, जिससे आम जनजीवन पर गहरा असर पड़ सकता है।
यह सिर्फ एक सामान्य मौसमी बदलाव नहीं है। पिछले कुछ सप्ताहों से लगातार जारी अस्थिर मौसम ने किसानों और शहरी निवासियों दोनों को घबराया हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण ऐसे चरम मौसमी घटनाओं की आवृत्ति बढ़ रही है। लेकिन अभी के लिए तुरंत जोखिम सबसे ज्यादा उत्तर भारत में है।
उत्तर प्रदेश में तबाही और ऑरेंज अलर्ट
उत्तर प्रदेश की स्थिति सबसे चिंताजनक बनी हुई है। सोमवार सुबह अचानक बदले मौसम ने राज्य के कई जिलों में हाहाकार मचा दिया। तेज हवाओं के साथ आई बारिश और बिजली गिरने से पेड़ उखाड़ दिए गए और बिजली के खंभे ढह गए। रिपोर्ट्स के अनुसार, इन आपदाओं में कुल 23 लोगों की जान चली गई, जिनमें अवैध क्षेत्रों में रह रहे लोग भी शामिल थे।
बारिश की मात्रा भी रिकॉर्ड तोड़ रही थी। संभल जिले में सबसे अधिक 130 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि कासगंज में 97 मिलीमीटर बारिश हुई। बेरیلی, बाराबंकी, मुज़फ़्फ़रपुर और गोरखपुर जैसे जिलों में भी भारी बारिश दर्ज की गई। तापमान में भी भारी गिरावट आई; कई हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य से 10-12 डिग्री सेल्सियस कम हो गया। बाराबंकी में अधिकतम तापमान 26.5°C दर्ज किया गया, जो सामान्य से 12 डिग्री कम था।
मौसम विभाग ने मंगलवार के लिए उत्तर प्रदेश के 21 जिलों में गरज-चमक और ओलावृष्टि का 'ऑरेंज अलर्ट' जारी किया है। इसके अलावा, 30 जिलों में 70 किमी प्रति घंटे तक की तेज हवाओं चलने की चेतावनी दी गई है। बांदा, प्रयागराज, वाराणसी, आजमगढ़, मऊ, बलिया, अयोध्या और अंबेडकर नगर सहित कई जिलों में विशेष सावधानी बरतने कहा गया है।
हिमाचल और उत्तराखंड में हिमपात और भारी बारिश
पहाड़ी राज्यों में भी मौसम ने करवट बदली है। हिमाचल प्रदेश में चंबा, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी, शिमला, किन्नौर और लाहौल-स्पीटी जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। अधिकांश क्षेत्रों में 7 मई तक बारिश, अंधड़ और ओलावृष्टि का अनुमान है, जबकि ऊंची चोटियों पर हिमपात की संभावना जताई गई है।
विक्रम सिंह, निदेशक of उत्तराखंड मौसम विज्ञान केंद्र ने स्पष्ट चेतावनी दी है। उन्होंने बताया कि 30 मई तक राज्य के कई हिस्सों में भारी बारिश हो सकती है। हल्की से मध्यम बारिश का दौर जारी रहेगा, साथ ही तेज हवाओं के साथ ओलावृष्टि और गरज के साथ पानी की बौछार भी हो सकती है। इससे पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है।
दिल्ली, पंजाब और हरियाणा में धूल भरी आंधी
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और उसके पड़ोसी राज्यों पंजाब और हरियाणा में भी मौसम अशांत बना हुआ है। पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से यहाँ बारिश के साथ-साथ धूल भरी आंधी और तेज हवाओं का दौर चल रहा है। NDTV की रिपोर्ट्स के अनुसार, दिल्ली में अचानक ओलावृष्टि और बारिश ने लोगों को हैरान कर दिया। 79 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलती तेज हवाओं ने कई जगह बोर्ड और पेड़ गिराए हैं।
इसके विपरीत, राजस्थान और अन्य शुष्क क्षेत्रों में लू और धूल भरी आंधी की चेतावनी जारी है। यह विरोधाभासी स्थिति—एक तरफ भारी बारिश और दूसरी तरफ तीव्र गर्मी—जन स्वास्थ्य के लिए चुनौतीपूर्ण है।
पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत में मूसलाधार बारिश
केवल उत्तर भारत ही नहीं, पूर्वोत्तर भारत की स्थिति भी गंभीर बनी हुई है। 30 मार्च से 2 अप्रैल के बीच असम और मेघालय में हल्की से मध्यम बारिश के साथ कुछ जगहों पर भारी बारिश की संभावना है। अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 'मूसलाधार बारिश' का खतरा है।
पूर्वी भारत में, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 1 अप्रैल तक गरज-चमक के साथ बारिश जारी रहेगी। झारखंड के लिए 31 मार्च और 2 अप्रैल को बिजली गिरने और तेज हवाओं के साथ बारिश की चेतावनी दी गई है। बिहार और गंगा तटीय पश्चिम बंगाल में 31 मार्च को मौसम का रौद्र रूप देखने को मिल सकता है, जहाँ हवाओं की रफ्तार 60 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।
किसानों और आम जनता के लिए क्या है?
ओलावृष्टि किसानों के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती है। फसलों को होने वाले नुकसान का अनुमान लगाना मुश्किल है, लेकिन पिछले वर्षों का डेटा बताता है कि ओले से फसल पूरी तरह तबाह हो सकती है। IMD ने इस दौरान 'विशेष सावधानी' बरतने की सलाह दी है।
आम जनता के लिए सलाह है कि खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहें। तेज हवाओं के कारण गिरने वाले पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहें। बिजली गिरने के खतरे को ध्यान में रखते हुए खुले मैदानों या ऊंची इमारतों के पास न रुकें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
उत्तर प्रदेश में मौतों की संख्या कितनी है?
रिपोर्ट्स के अनुसार, तेज आंधी और बारिश के कारण पेड़ और दीवारें गिरने से उत्तर प्रदेश में कुल 23 लोगों की जान चली गई है। इनमें अवैध क्षेत्रों में रह रहे 7 लोग भी शामिल हैं। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले कुछ दिनों तक इसी तरह के हालात बना रह सकते हैं।
हिमाचल प्रदेश में मौसम की स्थिति कैसी रहेगी?
हिमाचल प्रदेश के चंबा, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी, शिमला, किन्नौर और लाहौल-स्पीटी जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी है। 7 मई तक बारिश, अंधड़ और ओलावृष्टि का अनुमान है। ऊंची चोटियों पर हिमपात की भी संभावना जताई गई है, जिससे यातायात प्रभावित हो सकता है।
दिल्ली और पड़ोसी राज्यों में क्या अपेक्षा की जा रही है?
दिल्ली, पंजाब और हरियाणा में पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से बारिश, तेज हवाएं और धूल भरी आंधी का दौर जारी है। 79 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलती हवाओं ने पहले ही क्षति पहुंचाई है। प्रशासन ने लोगों को खराब मौसम के दौरान सावधानी बरतने की सलाह दी है।
पूर्वोत्तर भारत में बारिश की स्थिति क्या है?
असम और मेघालय में भारी बारिश की संभावना है, जबकि अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में मूसलाधार बारिश का खतरा है। यह स्थिति इन क्षेत्रों में बाढ़ और भूस्खलन का कारण बन सकती है, इसलिए स्थानीय प्रशासन सतर्क है।
किसानों को ओलावृष्टि से कैसे बचना चाहिए?
ओलावृष्टि फसलों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। IMD ने किसानों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। संभव हो तो फसलों की सुरक्षा के उपाय करें और मौसम की चेतावनी मिलने पर खेतों में काम करने से बचें। बीमा कवर का उपयोग करना भी एक सुरक्षा उपाय हो सकता है।