IPO कैसे समझें और जल्दी सही फैसला लें
क्या कोई नया IPO खरीदना चाहिए या नहीं? सीधे-साधे शब्दों में: IPO में जल्दी लाभ भी मिलता है, लेकिन नुकसान का जोखिम भी ज्यादा रहता है। यहाँ आपको वो जानकारी मिलेगी जो रोज़ाना निवेशक तुरंत इस्तेमाल कर सके।
आवेदन और आवंटन कैसे देखें
सबसे पहले IPO की प्रोस्पेक्टस (RHP/DRHP) पढ़ें। कंपनी का काम, प्रॉफिट-लॉस, promoters का शेयर होल्डिंग और फंड कहां लगेगा — ये तीन बातें सबसे ज़रूरी हैं।
आवेदन करने का सामान्य तरीका ASBA के जरिए होता है। अपने ब्रोकरेज अकाउंट या बैंक नेट बैंकिंग से ASBA में आवेदन करें। आवेदन के बाद आवंटन जानकारी देखने के लिए कंपनी के रजिस्ट्रार (Bigshare, KFintech आदि), BSE/NSE या एनएसई/बीएसई की वेबसाइट पर जाकर PAN या एप्लीकेशन नंबर से चेक करें। उदाहरण के लिए, साई लाइफ साइंसेज़ आईपीओ का आवंटन 16 दिसंबर को ऑनलाइन देखा गया था।
GMP यानी ग्रे मार्केट प्रीमियम जल्दी माहौल बताता है। Anthem Biosciences के IPO में GMP ₹175 दिखा था और संभावित लिस्टिंग प्रॉफिट के अनुमान भी वेबसाइट्स पर आ गए थे। ध्यान रहे, GMP गैर-प्रमाणित संकेत है — भरोसा पूरी तरह उस पर मत करना।
लिस्टिंग दिन: क्या करें और क्या न करें
लिस्टिंग पर पहली बार शेयर खुलते ही दो स्कैनARIOS अच्छे होते हैं: तेज़ उछाल तो प्रॉफिट निकल लें; नहीं तो धैर्य रखें। अगर कंपनी का बिजनेस मजबूत है और वैल्यूएशन ठीक है, तो लाँग-टर्म रखें।
लिस्टिंग वे दिन भाव बहुत उड़ सकते हैं। कुछ लोग आईपीओ पर तुरंत सेल कर लेते हैं और छोटे मुनाफे पर संतुष्ट हो जाते हैं। कुछ निवेशक 6-12 महीने तक रखते हैं और कंपनी के प्रदर्शन के आधार पर निर्णय लेते हैं। आपकी रणनीति आपकी रिस्क-टॉलरेंस पर निर्भर करनी चाहिए।
जो बातें अनदेखी नहीं करनी चाहिए: प्राइस बैंड की तुलना हालिया IPOs से, निवेशकों की सब्सक्रिप्शन रिपोर्ट (कितना ओवरसब्सक्राइब हुआ), और मैनेजमेंट की ट्रैक रिकॉर्ड। उदाहरण के तौर पर, साई लाइफ साइंसेज़ का IPO कई श्रेणियों में ओवरसब्सक्राइब हुआ था — यह एक संकेत हो सकता है पर गारंटी नहीं।
जोखिमों को समझें: IPO में बाजार जोखिम, वैल्यूएशन का बढ़ा हुआ प्राइस, और लिक्विडिटी समस्या हो सकती है। छोटी कंपनियों में फ्लैक्चुएशन तेज़ होते हैं। कोई भी फैसला लेने से पहले अपने बुनियादी वित्तीय लक्ष्य, टाइमहॉराइजन और एक्सपोज़र तय कर लें।
अंत में, छोटी चेकलिस्ट: 1) प्रोस्पेक्टस पढ़ें; 2) ASBA से आवेदन करें; 3) आवंटन/रजिस्ट्रार चेक करें; 4) GMP को संदर्भ समझकर लें; 5) लिस्टिंग पर त्वरित निर्णय या होल्डिंग—आपकी योजना के अनुसार। आईपीओ पर समझदारी से कदम रखें और किसी भी शॉर्टकट पर अधिक भरोसा न करें।