शेयर बाजार छुट्टी: कब बंद रहते हैं NSE और BSE
शेयर बाजार छुट्टी का मतलब सीधे-सीधे यह है कि NSE और BSE पर ट्रेडिंग नहीं होगी। ऐसी छुट्टियाँ राष्ट्रीय त्योहार, स्थानीय त्यौहार या एक्सचेंज द्वारा घोषित खास कारणों से होती हैं। रोजाना के कामकाज पर असर जानना निवेशक के लिए जरूरी है ताकि आदेश, भुगतान और सेटलमेंट में परेशानी न हो।
किस तरह की छुट्टियाँ होती हैं?
मुख्य रूप से तीन तरह की छुट्टियाँ होती हैं: राष्ट्रीय (जैसे गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस), धार्मिक/सांस्कृतिक (जैसे दिवाली, होली) और तकनीकी/अन्य (जैसे एक्सचेंज का विशेष बंद)। कुछ दिन सिर्फ एंट्री/सेटलमेंट के लिए सीमित होते हैं। एक्सपायरी डे या मार्केट-ओपन में बदलाव भी कभी-कभी होता है।
आपको नियमित रूप से NSE और BSE की आधिकारिक वेबसाइट पर "Market Holidays" सेक्शन चेक करना चाहिए। वहां सालभर का कैलेंडर रहता है और आखिरी समय में होने वाले बदलाव भी अपडेट होते हैं। वैराग समाचार जैसी साइटें भी हॉलिडे नोटिस पर अपडेट दे देती हैं।
ट्रेडिंग और सेटलमेंट पर असर
जब मार्केट बंद रहता है तो आप ब्रॉकर के जरिए नया ऑर्डर लगा सकते हैं, पर वह ऑर्डर मार्केट खुलने पर ही एग्जीक्यूट होगा। IPO लिस्टिंग अगर छुट्टी पर आती है तो लिस्टिंग अगला ट्रेडिंग दिन होती है—इसका असर प्राइस और GMP पर पड़ सकता है।
सेटलमेंट (T+1/T+2) भी प्रभावित हो सकता है। उदाहरण के लिए, अगर खरीद का T+2 दिन छुट्टी में फंसता है तो सेटलमेंट अगला चालू दिन होगा—इसलिए रकम और शेयर लेनदेन का समय ध्यान रखें।
बाय-सेल के ऑटो-निहित आदेश जैसे SIP या SIP-ऑटो-डेबिट पर कोई खास बदलाव नहीं होता, पर बैंक हॉलिडे से डेबिट डेट में देरी हो सकती है—अपने ब्रोकरेज और बैंक नोटिफिकेशन देखें।
F&O (फ्यूचर्स और ऑप्शन्स) की एक्सपायरी डेट पर भी नजर रखें। अगर एक्सपायरी के आस-पास कोई छुट्टी आती है तो रॉलओवर, एक्सरसाइज या प्रॉफिट बुक करने की रणनीति पहले से बनाएं।
क्या आप विदेशी बाजारों पर भी नजर रखते हैं? भारत की छुट्टी के दौरान अंतरराष्ट्रीय मार्केट खुले होते हैं, जिससे प्राइस गैप या वीओलेटिलिटी बढ़ सकती है जब भारतीय बाजार फिर खुलते हैं।
सरल टिप्स: छुट्टी से पहले अपने इमरजेंसी ऑर्डर (स्टॉप-लॉस), मार्जिन स्थिति और ब्रोकरेज लिमिट चेक कर लें। अगर लंबे समय के लिए बाहर रह रहे हैं तो ऑटो-ट्रैकर या ब्रोकरेज के "Good Till Cancelled" विकल्प समझ लें।
अंत में, छुट्टियों की छोड़ी हुई जानकारी को कैलेंडर में मार्क करें और ब्रोकरेज, बैंक व एक्सचेंज की ईमेल/एसएमएस सूचनाएँ ऑन रखें। सही जानकारी और थोड़ी तैयारी से छुट्टियाँ आपके निवेश को नकारात्मक नहीं बल्कि व्यवस्थित बना सकती हैं।